


गुघाल मेला सहारनपुर: आस्था के मेले में भ्रष्टाचार का खेल, जनता की गाढ़ी कमाई पर ठेकेदारों का डाका – प्रशासन और नेता मौन
धार्मिक आस्था से जुड़े मेले में अवैध वसूली, टिकटबाजी और गुल्ली गैंग की मनमानी, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली सच्चाई
📍 सहारनपुर, 16 सितम्बर 2025। सहारनपुर का गुघाल मेला, जो सदियों से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और भक्ति का केंद्र रहा है, आज भ्रष्टाचार और ठगी की अंधेरी परछाइयों में घिर गया है। मेला प्रबंधन और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है, जबकि प्रशासन और राष्ट्रवादी झंडा उठाने वाले नेता इस पूरे मामले पर आंख मूंदे बैठे हैं। जनता उम्मीद लेकर मेले में पहुंचती है, लेकिन वहां उसका स्वागत गाली-गलौज, ठगी और शोषण से होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेला ठेकेदारों ने बाकायदा गुल्ली गैंग पाल रखा है, जो टिकटबाजी और खेल-तमाशों में जनता से पैसे ठगने का काम करता है। कुतुबशेर पुलिस ने कुछ दिन पहले ऐसे गैंग को पकड़ा भी था, लेकिन मेले का असली खेल अब भी जारी है। झूले और जलपरी जैसे खेलों में टिकट खरीदने के बावजूद लोगों को आधे-अधूरे पैसे लौटाए जाते हैं और विरोध करने पर उन्हें अपमानित किया जाता है। यह सिर्फ एक-दो लोगों की शिकायत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो भी इस गोरखधंधे की पोल खोल रहे हैं।
मेले के नाम पर दुकानदारों से मनमानी वसूली की जा रही है। झूलों, दुकानों और खेलों में ठेकेदारों के गुर्गे सक्रिय हैं, जो जबरन पैसों की मांग करते हैं। टिकट लेने के बाद पूरा पैसा न लौटाना और गाली-गलौज करना तो आम बात हो चुकी है। जनता बेबस होकर इसे झेल रही है, क्योंकि राजनीतिक संरक्षण इतना मजबूत है कि कोई अधिकारी ठेकेदारों या गुर्गों पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।
एक ताजा घटना ने मेला प्रबंधन की हकीकत और भी साफ कर दी। जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय नेता जब गुघाल मेले में विद्युत ठेकेदार सेठपाल के पास अवैध वसूली के लिए पहुंचे, तो उन्हें अपमानित होकर लौटना पड़ा। सेठपाल ने साफ कह दिया कि यहां सब पहले से ही सेटिंग पर चल रहा है, और किसी को कुछ देने की कोई जरूरत नहीं है। इस बयान ने पूरे मेला सिस्टम की सच्चाई उजागर कर दी – जहां सबकुछ पहले से बंटा हुआ है और जनता की गाढ़ी कमाई ठेकेदारों की जेब में जा रही है।
जनता का कहना है कि यह मेला, जो कभी श्रद्धा और आनंद का प्रतीक था, अब भ्रष्टाचार और धन उगाही का अड्डा बन चुका है। मनोरंजन और भक्ति के नाम पर आने वाले लोग अब खुद को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है, “हम अपने बच्चों और परिवार के साथ मेला घूमने आते हैं, लेकिन यहां ठगी और गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है। आस्था की जगह अब यहां डर और अविश्वास है।”
समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन और पुलिस निष्पक्ष होकर जांच और कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक गुघाल मेला अपनी ऐतिहासिक और पवित्र पहचान खोता जाएगा। सवाल यह भी है कि आखिर जनता की गाढ़ी कमाई पर हो रही इस लूट का जिम्मेदार कौन है? ठेकेदार, मेला प्रबंधन या वे नेता जो जनता की आस्था को ढाल बनाकर अपने हित साध रहे हैं?
गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले को सबसे पहले समृद्ध भारत समाचार पत्र और वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ ने उजागर किया। मीडिया की यह जिम्मेदारी ही है कि वह जनता की आवाज बने और भ्रष्टाचार का सच सामने लाए। यदि मीडिया इस मुद्दे को सामने न लाता, तो शायद यह पूरा खेल चुपचाप चलता रहता और जनता हर साल ठगी का शिकार होती रहती।
📌 आज सहारनपुर की जनता प्रशासन और राष्ट्रभक्त महापौर से यही मांग कर रही है कि मेले में लूट-खसोट और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और जनता की आस्था की रक्षा हो। गुघाल मेला सिर्फ धन उगाही का अड्डा न बनकर फिर से वही बने, जो इसकी असली पहचान है – धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक।
रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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